भारत की न्यूक्लियर पॉलिसी पाकिस्तान की बजाय चीन पर शिफ्ट, बना रहे हैं 3 नए एडवांस एटॉमिक हथियार

Bulletin of the Atomic Scientists claim, India's nuclear strategy is shifting from Pakistan to China Image Source : FILE

नई दिल्ली: भारत की परमाणु रणनीति का फोकस अब पाकिस्तान से हट कर चीन पर शिफ्ट हो रहा है। ये निष्कर्ष ‘बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट्स’ में प्रकाशित एक स्टडी का है। बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट्स ऐसी संस्था है जो दुनिया भर में परमाणु कार्यक्रम पर नजर रखती है। किस देश ने कैसे अपनी न्यूक्लियर पॉलिसी को कितना चेंज किया है, इस पर रिसर्च करती है।

न्यूक्लियर वॉर की धमकी बात बात पर पाकिस्तान देता है लेकिन बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट्स (BoAS) के मुताबिक भारत ने अपने परमाणु सुरक्षा रणनीति में बड़ा फेरबदल किया है। स्टडी के अनुसार भारत ने अपनी न्यूक्लियर पॉलिसी पाकिस्तान की बजाय चीन पर शिफ्ट कर दी है। वहीं भारत 3 नए एटॉमिक हथियार भी तैयार कर रहा है। इसके अलावा 150 से 200 परमाणु बम बनाने के लिए प्लूटोनियम इकट्ठा कर रखा है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक 2017 डोकलाम स्टैंडऑफ के बाद से भारत को अपनी न्यूक्लियर पॉलिसी बदलनी पड़ी। दरअसल डोकलाम के बाद सरकार को चीन पर सीक्रेट दस्तावेज सौंपे गए जिसमें जिक्र था कि चीन हमला करके भारतीय सरजमीं पर कब्जा करना चाहता है और जब भारतीय सेना अपनी जमीन वापस लेने की कोशिश करेगी तो परमाणु हथियार तैनात कर दिए जाएंगे।

चीन लेकिन  यहां यह भूल गया था कि हिंदुस्तान पहले से न्यूक्लियर ट्रॉयड सपन्न देश है। यानि भारत आसमान से, जमीन से और समंदर के अंदर से परमाणु हमला करने में सक्षम है। भारत के पास ऐसे हथियार हैं जो तीनों मोर्चों से किसी भी देश पर न्यूक्लियर वार कर सकते हैं।

भारत आसमान से सुखाई, मिराज 2000, जैगुआर और राफेल से परमाणु हमला कर सकता है। वहीं जमीन से अग्नि और पृथ्वी मिसाइल सीरीज से न्यूक्लियर अटैक कर सकता है और समंदर के अंदर से K-15 और K-4 मिसाइल से एटॉमिक वार कर सकता है।

पाकिस्तान छोटा देश है और वहां पर हमला करने के लिए ज्यादा लंबी दूरी की मिसाइल की जरूरत नहीं है लेकिन चीन बहुत बड़ा देश है। दिल्ली से चीन की राजधानी बीजिंग की दूरी 3782 किलोमीटर है। ऐसे में अगर दोनों देशों के बीच जंग होती है तो काफी लंबी दूरी की मिसाइल की जरूरत पड़ेगी और इसके लिए भारत के पास अग्नि सीरीज की मिसाइल मौजूद हैं।

इन मिसाइलों में सबसे शक्तिशाली है अग्नि-5। ये 5000 किलोमीटर दूर तक सटीक निशाना लगा सकती है। इसकी रफ्तार आवाज़ की गति से 24 गुना ज़्यादा है। यानी क़रीब 30 हज़ार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हमला करने में सक्षम है। ये मिसाइल 17 मीटर लंबी है और 2 मीटर चौड़ी है जो डेढ़ टन परमाणु बम लेकर लॉन्च की जा सकती है।

भारत की अग्नि-5 टेक्नोलॉजी के मामले में सबसे एडवांस, सबसे अव्वल है। ये नेवीगेशन, गाइडेंस, वॉरहेड और हाईटेक इंजन से लैस है। इसके अलावा अग्नि 6 मिसाइल का काम भी तेजी से चल रहा है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि अग्नि 6 की रेंज 11 से 12 हजार किलोमीटर तक होगी।

वहीं भारत के पास 120-130 एटम बम हैं और चीन के पास 270। भारत NO FIRST USE पॉलिसी को मानता है और चीन कहने के लिए इसी नियम का पालन करता है लेकिन चीन पर भरोसा करना खुद को धोखा देने के बराबर है। जिनपिंग और कम्यूनिस्ट पार्टीअपनी सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। ऐसे में ये न्यूक्लियर ट्रायड भारत को चीन के ख़िलाफ़ बड़ी ताक़त देता है।

बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट्स ने एक ऐसी बात छापी है जिसने चीन को सबसे ज्यादा चिंता में डाल दिया है। रिपोर्ट कहती है कि भारत 3 तरह के नए हथियार बना रहा है और ये जल्द तैयार हो सकते हैं। ये ऐसे वैपेन होंगे जिसके बारे में किसी को कुछ नहीं पता है।

चीन को लगता था कि वो भारत के किसी भी कोने पर मिसाइल से हमला कर सकता है लेकिन पिछले कुछ साल में भारत ने चीन को फोकस करते हुए अपनी युद्धनीति पूरी बदल दी है जिसके बाद से अब मुकाबला बराबरी का है।



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