सचिन ने अपना राजनीतिक भविष्य खतरे में डाला आमीन पठान

सचिन ने अपना राजनीतिक भविष्य खतरे में डाला आमीन पठान

रायबरेली सदर युवक कांग्रेस अध्यक्ष आमीन पठान ने कहा कि कमीने ये फ़िल्म का नाम है, जो कुछ बरस पहले आयी थी। फ़िल्म का डायलॉग् है- "जिंदगी में कामयाबी के दो रास्ते होते हैं। एक शार्टकट, दूसरा छोटा शार्टकट"। विशाल भारद्वाज ने यह नही बताया था कि पतन के भी दो रास्ते होते हैं- "एक शॉर्टकट, दूसरा छोटा शार्टकट".


सचिन औऱ ज्योतिरादित्य ने छोटा शार्टकट लिया है। पतन कहना फिट नही है, इनके कॅरियर खत्म नही होंगे, मगर पीक प्रोस्पेक्टस अब डिम हैं। इसलिए कि भाजपा, या कांग्रेस से बाहर की राजनीति इन्हें वो कभी नही मिलेगा, जो कांग्रेस में मिल सकता था। इसलिए कि चूहे की मूंछ का बाल, भेड़िए की पूंछ में चिपक जाए, तो भेड़िया उस पर ताव नही देता। 

जवानी में राज्यो में मजबूत रहे चिमनभाई, ममता, शरद पवार जैसे एक्स कांग्रेसी, पकी उम्र तक, अधिक से अधिक किसी राज्य के मुख्यमंत्री तक गए। सचिन और ज्योतिरादित्य के लिए यह पद 40 की उम्र में ही कैचिंग डिस्टेंस पर था। उस पर हाथ बढ़ाने की कोशिश में गुल्लक फोड़कर गुडलक निकाला जा रहा था। गुल्लक भी फूट गयी, गुडलक भी दूर छिटक गया। 

पर क्या सच मे इनकी महत्वाकांक्षा महज एक राज्य के सीएम पद की थी? वो कौन सा सम्मान था, जो नही मिला। सरकारें आयी, तो अफसरो की नियुक्ति-ट्रांसफर-पोस्टिंग, समर्थकों को निगमों मंडलों या कैबिनेट में भागीदारी, खुद का सुपर सीएम जैसा पावर. असली आकांक्षा तो इतने की ही रही। पर यह नही हुआ जहां से चिक चिक शुरू हुई। 

इसके लिए विधायक तोड़ने सरकार गिराने और बगावत का झंडा बुलंद करने का औचित्य  कितना है। जिस संस्थान से खुद को, बाप को पहचान मिली, उसकी नींव पर बम रखने से कौन सा बड़ा पद या इज्जतफजाई होनी है? बाप की तमाम विरासत पर पानी फेर दूसरे के तम्बू में सिरे से दरी बिछाने की चाकरी, कौन सा मास्टरस्ट्रोक रहा, यह ताजिंदगी सोचेंगे। जो इन्होंने अपना राजनीतिक भविष्य खतरे में डाला..

कामयाबी का छोटा शॉर्टकट, सिर्फ इनके करियर बियाबान में नही लाया है। साथ मे उनके समर्थक, कांग्रेस और 2 राज्यो के करोड़ो लोगो का मुस्तकबिल भी बयाबां में है, जिन्होंने तमाम गुंडा तंत्र, पैसे, नफरत और ताकत की राजनीति को धता बताकर इनपर अपना भरोसा जताया था। जनता का भरोसा तोड़ा गया, जनादेश की सैंकटिटी छेड़ी गयी। यह अक्षम्य है, धोखा है। 
 मगर दूसरी पीढ़ी के राजनीतिज्ञ को मालूम होना चाहिए कि इस खेल में माकूल वक्त का इंतजार किया जाता है। अंडे के लिए मुर्गी और गुडलक के लिए गुल्लक का पेट नही फाड़ा जाता। अधीरता आपको लालची बना देती है। कठपुतली बना देती है। 

आमीन पठान
अध्यक्ष-युवक कांग्रेस
सदर रायबरेली 9451726664

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