पीएम स्वनिधि योजना का पुनर्गठित चरण
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 27 अगस्त 2025 को पुनर्गठित पीएम स्वनिधि योजना को मंजूरी दी गई थी। इसके तहत स्ट्रीट वेंडरों को ऋण उपलब्ध कराने की अवधि बढ़ाकर 31 मार्च 2030 तक कर दी गई है।
पुनर्गठित योजना में स्ट्रीट वेंडरों को वित्तीय सहायता के साथ-साथ डिजिटल वित्तीय समावेशन, सामाजिक सुरक्षा, क्षमता निर्माण और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण की सुविधा
पीएम स्वनिधि योजना के माध्यम से शहरी स्ट्रीट वेंडरों को बिना किसी गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इस पहल का उद्देश्य छोटे कारोबारियों और रेहड़ी-पटरी लगाने वाले लोगों को अपना व्यवसाय चलाने और उसे आगे बढ़ाने में आर्थिक सहायता देना है।
डिजिटल वित्तीय समावेशन पर भी जोर
पुनर्गठित योजना में केवल ऋण उपलब्ध कराने तक सीमित न रहते हुए स्ट्रीट वेंडरों को डिजिटल वित्तीय सेवाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा, कौशल एवं क्षमता निर्माण और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
स्ट्रीट वेंडरों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है पीएम स्वनिधि?
- बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण की सुविधा।
- छोटे कारोबार को दोबारा शुरू करने और बढ़ाने में मदद।
- डिजिटल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा।
- सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने पर जोर।
- क्षमता निर्माण और उद्यमिता को प्रोत्साहन।
- योजना की ऋण अवधि 31 मार्च 2030 तक बढ़ाई गई है।
पीएम स्वनिधि योजना का उद्देश्य
पीएम स्वनिधि योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी स्ट्रीट वेंडरों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ना और उन्हें अपने व्यवसाय के लिए आवश्यक कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराना है। योजना के जरिए छोटे विक्रेताओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आजीविका को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
PIB की मूल जानकारी
इस खबर की जानकारी प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) हिंदी के आधिकारिक X पोस्ट के माध्यम से सामने आई है।
शहरी स्ट्रीट वेंडरों को बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराने के लिए 1 जून 2020 को आरंभ की गई प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना ने अपने पुनर्गठित चरण का एक वर्ष पूरा कर लिया है।
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) हिंदी