CBG की नई कीमत ₹2110 प्रति MMBtuCBG की नई कीमत ₹2110 प्रति MMBtu
नई दिल्ली, 29 अगस्त 2026: CBG की नई कीमत को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया है कि संशोधित मूल्य निर्धारण व्यवस्था से CNG और घरेलू PNG उपभोक्ताओं पर कोई बड़ा अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, GOBARdhan योजना के तहत Compressed Biogas (CBG) की कीमत ₹2,110 प्रति MMBtu निर्धारित की गई है।

सरकार ने कहा है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य CBG उत्पादकों को स्थिर और व्यवहार्य कीमत उपलब्ध कराना है, जबकि सरकारी सहायता और बड़े घरेलू गैस पूल के माध्यम से उपभोक्ताओं पर कीमत का प्रभाव न्यूनतम रखा जाएगा।

CBG की नई कीमत ₹2,110 प्रति MMBtu तय

मौजूदा व्यवस्था में CBG उत्पादकों को मिलने वाली कीमत CNG के खुदरा बिक्री मूल्य के 85 प्रतिशत से जुड़ी हुई थी। नवीनतम संशोधन के आधार पर यह कीमत लगभग ₹1,478 प्रति MMBtu बैठती है। अब GOBARdhan योजना के तहत CBG की खरीद कीमत ₹2,110 प्रति MMBtu तय की गई है।

इस हिसाब से पुरानी कीमत की तुलना में खरीद मूल्य में लगभग 43 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कीमत सीधे CNG या घरेलू PNG उपभोक्ताओं से वसूल नहीं की जाएगी।

सरकार देगी ₹10 प्रति किलो की सहायता

सरकार के अनुसार, CBG की कीमत को उपभोक्ताओं के लिए किफायती बनाए रखने के लिए ₹10 प्रति किलोग्राम CBG की affordability support दी जाएगी। 95 प्रतिशत मीथेन वाले CBG के लिए यह सहायता लगभग ₹215 प्रति MMBtu के बराबर है।

इस सरकारी सहायता को घटाने के बाद CBG की प्रभावी लागत लगभग:

₹2,110 – ₹215 = ₹1,895 प्रति MMBtu

इस प्रकार मौजूदा लगभग ₹1,478 प्रति MMBtu की तुलना में प्रभावी वृद्धि करीब 28 प्रतिशत रह जाती है।

CNG और PNG ग्राहकों पर कितना पड़ेगा असर?

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि CBG को उसकी खरीद कीमत पर सीधे CGD कंपनियों को नहीं बेचा जाता। इसे अन्य घरेलू स्तर पर उत्पादित प्राकृतिक गैस के साथ मिलाकर गैस पूल का हिस्सा बनाया जाता है। इसके बाद इसकी लागत संबंधित घरेलू गैस पूल में फैलाई जाती है।

पहले CBG की लागत केवल CNG (Transport) और PNG (Domestic) से जुड़े सीमित APM गैस आवंटन पर फैलाई जाती थी। नई व्यवस्था में CBG की शुद्ध लागत को पहले की तुलना में लगभग 2.5 से 3 गुना बड़े घरेलू गैस बेस पर फैलाया जाएगा।

सरकार का कहना है कि गैस की लागत को इतने बड़े पूल में फैलाने से किसी एक उपभोक्ता पर पड़ने वाला प्रभाव नगण्य रहेगा।

CBG उत्पादकों को मिलेगा स्थिर मूल्य

नई मूल्य निर्धारण व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य देश में CBG उत्पादन को बढ़ावा देना और मौजूदा तथा नए CBG संयंत्रों को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है। सरकार के अनुसार, स्थिर खरीद मूल्य से उत्पादकों को अपने संयंत्रों को लंबे समय तक संचालित करने में मदद मिलेगी।

साथ ही, सरकारी affordability support और बड़े घरेलू गैस पूल का इस्तेमाल उपभोक्ताओं पर किसी महत्वपूर्ण कीमत वृद्धि को रोकने के लिए किया जाएगा।

सरकार ने क्या कहा?

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक संशोधित CBG pricing framework को इस तरह तैयार किया गया है कि CBG उत्पादकों को व्यवहार्य और स्थिर कीमत मिले तथा दूसरी ओर CNG और घरेलू PNG उपभोक्ताओं पर किसी बड़े अतिरिक्त बोझ का असर न पड़े।

CBG Pricing: मुख्य बातें

विवरण राशि/स्थिति
पुरानी CBG कीमत लगभग ₹1,478 प्रति MMBtu
नई CBG खरीद कीमत ₹2,110 प्रति MMBtu
सरकारी सहायता ₹10 प्रति किलो CBG
सहायता का अनुमानित मूल्य लगभग ₹215 प्रति MMBtu
प्रभावी CBG लागत लगभग ₹1,895 प्रति MMBtu
प्रभावी वृद्धि लगभग 28%
गैस पूल का विस्तार लगभग 2.5 से 3 गुना

CBG क्या है और इसका महत्व क्यों बढ़ रहा है?

Compressed Biogas यानी CBG जैविक कचरे, खेती से जुड़े अवशेषों और अन्य जैविक पदार्थों से तैयार किया जाने वाला गैस ईंधन है। इसे प्राकृतिक गैस के विकल्प के रूप में परिवहन तथा अन्य क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जा सकता है। CBG उत्पादन को बढ़ावा देने से कचरा प्रबंधन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

सरकार की GOBARdhan पहल का उद्देश्य भी जैविक कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलना और देश में बायोगैस एवं CBG आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।

निष्कर्ष

CBG की नई कीमत ₹2,110 प्रति MMBtu किए जाने के बावजूद सरकार का कहना है कि CNG और घरेलू PNG उपभोक्ताओं पर इसका सीधा और बड़ा असर नहीं पड़ेगा। ₹10 प्रति किलो की सरकारी सहायता और CBG की लागत को बड़े घरेलू गैस पूल में फैलाने की व्यवस्था से उपभोक्ताओं पर प्रभाव को सीमित रखने का प्रयास किया गया है।

इस व्यवस्था से जहां CBG उत्पादकों को बेहतर और स्थिर कीमत मिलने की उम्मीद है, वहीं सरकार का लक्ष्य स्वच्छ ईंधन और जैविक कचरे से ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा देना है।

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स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार